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Motivational Context | एकनिष्ठ बनो

Updated: बुधवार, 12 फ़रवरी 2020 (12:29 IST)
भगवान कृष्ण रुक्मणी के साथ भोजन कर रहे थे तभी वे उठे और भागे, लेकिन द्वार पर ही रुककर पुन: लौटकर भोजन करने लगे।
 
 
उनकी इस हरकत को देखकर रुक्मणी ने उनसे पूछा- भगवन! अचानक आपको यह क्या हुआ कि आप भोजन करते-करते दौड़े और फिर द्वार पर ही ठीठक कर रुके और फिर पुन: लौट आए। आखिर कहां जाना चाहते थे और विचार बदल गया?
 
 
भगवान कृष्ण ने निराश होकर कहा- प्रिये! संकट में एक व्यक्ति मुझे पुकार रहा था, इसीलिए मैं उसकी मदद के लिए दौड़ा, लेकिन मैं वहां पहुंचता इससे पूर्व ही उस व्यक्ति ने अपनी आस्था बदल दी और वह किसी ओर को पुकारने लगा। तब मैं क्या करता, मैंने भी सोचा कि अब आराम से भोजन ही कर लिया जाए और उसे नियति पर छोड़ दिया जाए। उसने मुझ पर थोड़ा भी विश्वास और धैर्य नहीं रखा। वह व्यक्ति कभी भी एकनिष्ठ नहीं रह सकता, जिनमें विश्वास और धैर्य नहीं।
 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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