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मदर्स डे पर लघुकथा : एक चुटकी प्यार

Updated: शनिवार, 12 मई 2018 (17:22 IST)
’मां, पता है आज मैंने आपके जैसा हलवा बनाना सीख लिया।’ बेटे ने चम्मच भर गरमागरम हलवा मुंह में डालते हुए कहा।
 
’ अच्छा ? कैसे ? बताओ तो जरा।’ मां ने रसोई से ही उत्साह में पूछा।
 
’ अभी ही। आप हलवा बना रही थीं और मैं दरवाजे पर खड़ा देख रहा था। ’
 
’ चल, ऐसे भी कहीं आता है हलवा बनाना ! अच्छा बता तो कैसे बनाया ?’
 
’ देखो, सबसे पहले आपने कढ़ाही में घी डाला। फिर उसमें सूजी डाली। है न ?’
 
’ बिलकुल ठीक।’
 
’ उसे धीमी आंच पर भूनती रहीं। बदामी रंग होने तक। सुगंध पूरे घर में महकने लगी थी..तब आपने गुनगुना पानी डाला। फिर डाली शकर । उसे अच्छी तरह से हिलाया और ऊपर से सूखे मेवे डाले। बस हलवा तैयार हो गया। सही बताया ना मैंने ?’
 
’ अरे वाह ! तुमने तो सच में मुझ जैसा हलवा बनाना सीख लिया। शाबास बेटा।’
 
’ पर मां, सबसे आखिरी में आपने ऐसे चुटकी घुमाते हुए क्या डाला था? मैं देख ही नहीं पाया।’
 
’ वो .... कुछ नहीं बेटा..... वो तो यूं ही .....स्वाद के लिए बस एक चुटकी प्यार था।’
 
’ ओह मां ! तो सारा स्वाद उसी चुटकी से आता है? मैं कहां लाऊंगा एक चुटकी मां का प्यार? मैंने गलत कहा। मैं आपके जैसा हलवा नहीं बना सकता मां। '
लेखक के बारे में
सीमा व्यास
सीमा व्यास, राज्य संसाधन केन्द्र, इंदौर में कार्यक्रम अधिकारी हैं। नवसाक्षरों, महिला मुद्दों और सामयिक विषयों पर सृजनात्मक लेखन करती हैं। विविध पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।.... और पढ़ें

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