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हो गया गुलज़ार चुटकी में
सतपाल 'ख़याल' तेरे छूने से सहरा हो गया गुलज़ार चुटकी मेंख़ुशी से झूम उट्ठा ये दिले-बीमार चुटकी मेंभरोसा क्या करें तुझ पर तेरी फ़ितरत कुछ ऐसी हैकभी इन्कार चुटकी में,कभी इक़रार चुटकी में मुसीबत में मदद माँगी जो अपनों से तो सब के सबरफ़ूचक्कर हुए पकड़ी ग़ज़ब रफ़्तार चुटकी मेंजो बदक़िस्मत थे उनकी कश्तियाँ साहिल पे डूबी थींजो किस्मत के धनी थे हो गए वो पार चुटकी मेंहै सिक्कों की खनक में बात कुछ ऐसी कि इसने तोकिया रिश्तों को कैसे देखिए बाज़ार चुटकी मेंहमारा ज़िक्र जब छेड़ा किसी ने उसकी महफ़िल मेंहुए हैं सुर्ख़ तब उसके लबो-रुख़सार चुटकी मेंमिले गैरों से हँस-हँस कर तू मेरा जी जलाने कोमज़ा इस बात का लेते हैं मेरे यार चुटकी मेंजुआख़ाना है इक बाज़ार सट्टेबाज़ है दुनियाकिसी की जीत चुटकी में किसी की हार चुटकी मेंमेरे मौला, मेरे साईं, मेरे दाता मेरी सुन लेग़रीब-ओ- दर्दमंदों का तू कर उद्वार चुटकी में'
नसीम' उनका था नाम उस्ताद मिर्ज़ा दाग़ थे उनकेउन्होंने ही कहे चुटकी पे थे अशआर चुटकी मेंसियासी लोग हैं इनकी 'ख़याल' अपनी सियासत हैकभी इन्कार चुटकी में,कभी इक़रार चुटकी में।