shradh paksha
✕

शब्द महिमा

अमित पारनेरकर

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 31 जनवरी 2014 (12:03 IST)
संस्कृत मेरी जननी है
देवनागरी मेरी लिपि है

मैं निराकार हूं
जो आकार दोगे सो बन जाऊंगा
विचारों में तुम्हारे ढल जाऊंगा

मैं, 'मेरा' से रिश्ते तोड़ दूं
हम, हमारा, सबका से ह्रदय जोड़ दूं

जो व्याख्या करो तो वाक्य बना दूं
जो रचना करो तो काव्य बना दूं

“भारत छोड़ो” के नारे से अंग्रेजों को भगा दूं
“वंदे मातरम” से रक्त संचार बढ़ा दूं

मेरा तुम उपहास ना करना
मै वो हूं जो इतिहास बदल दूं
“ध” का “मा” हो तो प्राण हर लूं

मुझे उपयोग करने में ना हो मुश्किल कभी
“सत्य” “सरल” “सुंदर” “सही”, पहचान मेरी यही सही॥
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सबके लिए समय है... फिर अपने सपनों के लिए क्यों नहीं?

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

World Sight Day: क्‍यों मनाते हैं विश्व दृष्टि दिवस? जानिए इसका महत्‍व और इतिहास

क्यों मनाया जाता है भारतीय वायुसेना दिवस? जानें दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत का इतिहास