Hindi Poem | वो हँसी कहाँ से आती है
-डॉ. संध्या व्यास
ND
निर्बाध बहता
अविरल झरना खुशी का
भरसक फैले होंठ
खिली बत्तीसी
आँखों से झरती, गिरती, ढुलती
उन चेहरों की
वो हँसी कहाँ से आती है?
ND
सिर पर थैला, उमगते कदमों से
गली, मोहल्ला, हाट बाजार
लाल जलेबी, भजिए खाते
सज-सँवरकर
धूप को धूल चटाते
अल्ह़ड़ उन चेहरों की
वो हँसी कहाँ से आती है?
ND
निश्छल, लजाती कहीं
कभी वजह से
बेवजह ही कभी
खिलती, खनखनाती, फूटती,फैलती
उन चमचमाते गहनों सजे चेहरों की
वो हँसी कहाँ से आती है?

