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Written By WD

मेरे पास एक खुशबू बैठी है

सौ‍मित्र सक्सेना

साहित्य
NDND
मेरे पास एक खुशबू बैठी है

नारंगी चुनरी में लिपटी

हवा मे ठहरी हुई सी

वो मूरत टिकी है उसकी

अपनी ही कलाई पर

दो सोने के कंगनों के बीच

लाल चुडियों की ठसक से भरी!

मैंने अभी अभी

उसके भीगे बालों को चूमा है

वो अपनी गंध में

मेरा सिंदूर समेटे है

मैं

नींद में बंद आँखों में

ढूँढ रहा हूँ वो फूल

जिससे गढी गई है वो।

जब जब मुझसे टिककर

सो जाती है

एक देह

तब तब मुझे

अपने

बगीचे में होने का आभास

होने लगता है

NDND
पौधे लदफद गिर पड्ते हैं

एक दूसरे पर

चलती हवाओं के बीच

खुशबुएँ ढुलक जाती हैं

यहाँ से वहाँ

कभी कभार

हमसे होती हुईं भी।

साभार : वागर्थ
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WD