Mothers Day 2010 | माँ, तुझको गले लगाना है
रोहित जैन
ND
तू रात को सोती उठ बैठी हुई तेरे दिल में हलचल
जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है माँ
सब ग़म ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है माँ
जीवन का कैसा खेल है ये माँ तुझसे दूर हुआ हूँ मैं
वक़्त के हाथों की कठपुतली कैसा मजबूर हुआ हूँ मैं
जब भी मैं तन्हा होता हूँ, माँ तुझको गले लगाना है
भीड़ बहुत है दुनिया में तेरी बाँहों में आना है
जब भी मैं ठोकर खाता था माँ तूने मुझे उठाया है
थक कर हार नहीं मानूँ ये तूने ही समझाया है
मैं आज जहाँ भी पहुँचा हूँ माँ तेरे प्यार की शक्ति है
पर पहुँचा मैं कितना दूर तू मेरी राहें तकती है
छोती-छोटी बातों पर माँ मुझको ध्यान तू करती है
चौखट की हर आहट पर मुझको पहचान तू करती है
कैसे बंधन में जकड़ा हूँ दो-चार दिनों आ पाता हूँ
बस देखती रहती है मुझको आँखों में नहीं समाता हूँ
तू चाहती है मुझको रोके मुझे सदा पास रखे अपने
पर भेजती है तू ये कह के जा पूरे कर अपने सपने
अपने सपने भूल के माँ तू मेरे सपने जीती है
होठों से मुस्काती है दूरी के आँसू पीती है
बस एक बार तू कह दे माँ मैं पास तेरे रुक जाऊँगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊँगा।

