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बनजारे हैं पहाड़ के बादल

काव्य-संसार

Written By WD
Updated: मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010 (12:33 IST)
सुदर्शन वशिष्ठ
ND
बनजारे हैं पहाड़ के बादल
पहनाते हैं पहाड़ पेड़-पौधों को बंगें

एकदम ढाल लेते
चोटी ढलान खेत खलिहान के आकार।

बंगें, जो निशानियाँ हैं सौभाग्य की
सुहाग की

बादल की ये बंगें
टूटें न कभी

पहाड़ से बादल
रूठें न कभी।
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