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दरख़्त जब अशांत हैं

Written By WD
Updated: बुधवार, 15 अक्टूबर 2008 (15:49 IST)
त्रिलोक महाव र
WDWD
दरख़्त जब अशांत हैं

बेजुबान

दरख़्तों की भी तो

होती है जान

चोट लगने पर

रोते हैं

रिसते हैं

उनके भी जख़्‍म

देखा है

किसी ने रोते हुए

सिसकते हुए

वादियों में

सुना है उन्हें

गुनगुनाते हुए

हवा के साथ खिलखिलाते हुए

बेशक करते हैं

प्यार, दरख़्त भी

सावन की घटाओं स े

भीगते हैं

पहली फुहार से

झूमते हैं

पहाड़ों की गोद में

दरख़्त जब शांत हैं

तपस्वी हैं

मौनव्रती हैं

गहन साधना में लीन

दरख़्त जब अशांत हैं

तूफान हैं

भयंकर तूफान

दरख़्त दोस्त हैं

आदमी से कहीं बेहत र

सब कुछ लुटाकर भी

उफ नहीं करते।
साभार : संबोधन

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