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Written By स्मृति आदित्य

तुम्हारी आवाज का शहद

फाल्गुनी

तुम्हारी आवाज का शहद
ईद की खुशी बनकर
कानों में जो टपका
तुम्हारी आवाज का शहद
छम-छम नाच उठा
मन का मयूर और
टूट गई बाँधी हुई तुम्हारी हर हद।

बिखर गई कसमें
बिसर गई रस्में
बस याद रहे तुम
और तुम्हारी आवाज का उजाला
जिसने रात भर मुझे एक दुआ बना डाला।
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य