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जब मैं छोटा बच्चा था
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श्याम सखा 'श्याम' जब मैं छोटा बच्चा थासपनों का गुलदस्ता थाआज नुमाइश भर हूँ मैंपहले जाने क्या-क्या थाअब तो यह भी याद नहींकोई कितना अपना थाआज खड़े हैं महल जहाँ कल जंगल का रस्ता थानाजुक कन्धों पर लटकाभारी भरकम बस्ता थावो पगडंडी गई कहाँ जिस पर आदम चलता थातुझको पाने की खातिरउफ़ दर-दर मैं भटका थादर-दर मैं तो भटका था।