Hanuman Chalisa

ए स्त्री

पंकज शर्मा

Written By WD
Updated: मंगलवार, 17 अप्रैल 2012 (15:25 IST)
ND
ए स्त्री
उठ! हिम्मत कर! मत घबरा!
बार-बार गिरकर भी
फिर संभल हर बार
और इस बात की जरा भी
मत कर चिंता या फिक्र
कि तू हारेगी या जीतेगी
क्योंकि तेरी जीत तो तेरी
जीत है ही, मगर
तेरी हार भी तेरी जीत से
कुछ कम नहीं है अगर
तू लड़ती है अपने
वजूद के लिए
अन्याय से, अत्याचार से
अनाचार से, व्यभिचार से
और स्वयं से भी
क्योंकि
स्त्री भी दुश्मन है
स्त्री की।
ए स्त्री
उठ! हिम्मत कर! मत घबरा!
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना

कविता: लाल किला तुझे सलाम

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध