sundarkand

आँसू तो बहना है आखिर

ग़ज़ल

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 8 जनवरी 2010 (15:28 IST)
- विलास पंडित 'मुसाफ़िर'
ND
दुनिया का हर जुल्म सहना है आखिर
हमें आदमी बन के रहना है आखिर

जो बोलेंगे सच तो बुरे ही बनेंगे
हर बात चुप रह के सहना है आखिर

थे झूठे दिखावे, ये धोखा, दिलासा
हर शख्स जामा ये पहना है आखिर

जिसे आदमी कहते आए हैं हम तुम
बहुत बेशकीमती सा गहना है आखिर

हरेक मोड़ पर ही वो लूटा गया है,
' मुसाफ़िर' के आँसू तो बहना है आखिर।
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती पर बॉलीवुड के 25 सदाबहार गाने, हर दोस्त को आएंगे पसंद

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्ती कब बदल जाती है प्यार में? जानिए 7 बड़े संकेत

खूब खाइए कि आप लखनऊ में हैं...

फ्रेंडशिप डे 2026: दोस्त कितने प्रकार के होते हैं? जानिए किन दोस्तों से रहना चाहिए सतर्क