ganesh chaturthi
✕

कविता : रात की यारी

Updated: सोमवार, 3 अप्रैल 2017 (12:29 IST)
मैं अपनी कमीज गंदी करके पहनता हूं।
मैं आज भी चाय ठंडी करके पीता हूं।
 
सुबह की धूप से मेरी मौसिकी नहीं आज भी।
रात की यारी मैं आज भी पक्की करके जीता हूं।
 
न सताया करो देखकर यूं कभी-कभी।
मैं आज भी जेहन में तुमसे कत्ल होकर मिलता हूं।
 
खुश है कि नहीं कोई परिंदा दिल का।
कैसे हो पता, मैं आज भी अपने दिल की कहां सुनता हूं।
आशुतोष झा
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंच पर बढ़ायी भारत की प्रतिष्ठा और मान-सम्मान

नया भारत, नई उड़ान: मोदी युग में आत्मविश्वास का नया शिखर

17 सितंबर जन्मदिन पर विशेष: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में 25 दिलचस्प बातें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

अगला लेख