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हिन्दी कविता : बदला मौसम

Updated: शनिवार, 19 मई 2018 (10:05 IST)
चिड़िया
अब नहीं लाती दाना
घोंसले में छिपे
बच्चों के लिए
जो, अब लगने लगे हैं
उसे पराए से।
 
वह सोचती है कि
बच्चे भी सोचते हैं
ऐसा ही कुछ
शायद इसीलिए
वे अब खुद चुगते हैं दाना
कुछ भी नहीं कहते उससे।
 
और चिड़िया
कोशिश नहीं करती
दाना उठाने की
जो बच्चों की चोंच से
गिर जाता है बार-बार
घोंसले में...
क्योंकि परायों के लिए
कोई कुछ नहीं करता।
लेखक के बारे में
सुबोध श्रीवास्तव
परिचय : जन्म- 4 सितंबर 1966, शिक्षा- परास्नातक। 'आज' (हिन्दी दैनिक), कानपुर में कार्यरत। कई पुस्तकों का प्रकाशन, देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। दूरदर्शन, आकाशवाणी से प्रसारण। गणेश शंकर विद्यार्थी अतिविशिष्ट सम्मान प्राप्त तथा 'काव्ययुग' ई-पत्रिका का संपादन।.... और पढ़ें

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