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Last Updated : बुधवार, 13 फ़रवरी 2019 (13:02 IST)

बुंदेली गीत : बहू मिली है गुनवारी

Poems In Hindi
कित्ती नौनी बनी आज जा,
मटर-भटा की तरकारी।
 
लगो बघार तेल सरसों का,
राई नॉन जीरे डारे।
 
लहसुन-प्याज डार के भूंजो,
तिल डारे कारे-कारे।
 
झौंके गरम करैया में फिर,
भटा-मटर बारी-बारी।
 
संसी सें फिर पकर करैया,
भटा-मसालो टारो खूब।
 
दो लोटा भर पानी डारो,
ढंकना ढांक उबालो खूब।
 
तरकारी की उड़ी महक तो,
नचन लगे लोटा-थाली।
 
चटकारे ले-ले के रोटी,
तरकारी सब घर खा रओ।
 
डुकरा ससुर आज तो खुस है,
भौत बहू के गन गा रओ।
 
सास सोई के रई है उनखो,
बहू मिली है गुनवारी।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें