ramcharitmanas

कविता : नारी तेरे रूप अनेक

Updated: शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018 (16:29 IST)
- शिवानी गीते 
 
 
मैंने पूछा लोगों से नारी क्या है?
किसी ने कहा मां है, किसी ने कहा बहन,
किसी ने कहा हमसफर है, तो किसी ने कहा दोस्त।
सबने तुझे अलग रूपों में बयां कर दिया।
 
अब मैं क्या तेरे बारे में कहूं।
तू ममता की मुर्त है,
तू सच की सूरत है,
तू रोशनी की मशाल है जो अंधकार से ले जाती है परे।
 
तू गंगा की बहती धारा का वो वेग है जो पवित्र और निश्चल है।
तेरे रूप तो कई है,
तू अन्नपूर्णा है, तू मां काली है।
तू ही दुर्गा, तू ही ब्राह्मणी है।
 
मां यशोदा की तरह तूने कृष्ण को पाला,
गौरी बन शिव को संभाला।
तू हर घर के आंगन की तुलसी है,
तू ही सबका मान है,तू ही अभिमान है,
 
नवरात्री में तू नौ रूपों में पूजी जाती है।
लेकिन तेरे नौ नहीं तेरे तो अनेक रूप है,
ऐ नारी तुझे नमन।
 

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

अगला लेख