Hanuman Chalisa

उन्नाव के बहाने एक कविता : वह देह कई कई बार उधेड़ी गई थी

शिरीन भावसार
 
सट कर दीवार के एक कोने से
बेलगाम बहते आंसुओं से 
एक कहानी उकेरी गई थी....
 
मौन दीवार के भी हृदय में
वेदनाओं के धंसते शूल से
रक्त नलिकाएं रिसने लगी थी....
 
उम्र, रिश्ते, स्नेह, लगाव के बंधनों से मुक्त कर
दो उभार और एक छिद्र में समेटकर
मात्र देह घोषित की गई थी....
 
मौत के कगार पर खड़ी
टांके लगी पट्टियों में लपेटी
वह देह कई कई बार उधेड़ी गई थी....
 
बाद मौत से संघर्ष के और
झेलकर तमाम झंझावात
निरपराध अपराधिनी सी 
ज़मीन में नज़रे गढ़ाए
वह जीवित होकर 
पल पल मृत्यु को जी रही थी....
 
सह सकता भला कैसे पुरुषत्व
उठाना आवाज़ एक अबला का
अपनाकर नीति शाम दाम दंड भेद की
सहशरीर आवाज़ वह
कर दी गई चिर निद्रा के आधीन थी....
 
कब तक तमाशबीन बन
नमी आंखों की छुपाओगे
उमड़ आने दो सैलाब आंसुओं का 
कुछ तो साहस दिखलाओ अब....

Show comments

सभी देखें

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

Health Benefits of Banana: कच्चे और पके केले में कौन कौनसे विटामिन होते हैं?

Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

घर की 'एनर्जी' बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

सभी देखें

सावन मास पर हिन्दी में बेहतरीन कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

अगला लेख