Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

हिन्दी कविता : वृक्ष..

राकेशधर द्विवेदी
वृक्ष धरा का भूषण है
यह प्रतिपल नूतन आभूषण है


 
जन-जन का यह जीवनदाता
देश का है यह भाग्य-विधाता
 
कबहुं वृक्ष नहि निज फल चखता
परमारथ का संगीत सुनाता
 
पानी को यह संचित कर
सृष्टि को नवजीवन देता
 
प्राणीमात्र का जीवनदाता
पशु-पक्षी का शरणदाता
 
यह है अद्भुत त्यागी-बलिदानी
अचरज करते ऋषि-मुनि ज्ञानी
 
इसके त्याग की कहानी
गाते-सुनाते जन-मन वाणी
 
यह अनुपम धरोहर है राष्ट्र की
इसे सहेजो प्राण त्यागकर
 
यदि तुम इसे सहेज पाओगे
सृष्टि के संरक्षक कहलाओगे। 

Show comments

सभी देखें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

घर की 'एनर्जी' बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Swami Vivekananda Quotes: स्वामी विवेकानंद के 11 अनमोल कथन, जो हमें ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भर देंगे

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

क्या रूस में मोजतबा खामेनेई प्लास्टिक सर्जरी करवा रहे है, अयातुल्ला की अंतिम विदाई से रहस्यमयी अनुपस्थिति से उठे सवाल?

अगला लेख