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नीले घन को चीरकर, झाँक रहा देखो दिनकर

Updated: शुक्रवार, 14 जनवरी 2022 (16:16 IST)
सृष्टि नियंता -सूर्य
 
नीले घन को चीरकर, झाँक रहा देखो दिनकर।
 
दोनों बाहों को फैलाकर ,
जीवन पाता मैं प्रबल-प्रखर,
रश्मिकर ही तो है सुखकर,
पोषित करता सब पूरित कर।
जीवों को साँस  दिलाने को झाँक रहा देखो दिनकर।
 
सृष्टि की उत्पत्ति  तुमसे ,
भौतिक विकास संभव तुमसे ,
पुष्पों का खिलना तुमसे,
पादप की हरिता तुमसे 
जीवन अस्तित्व में लाने को झाँक रहा देखो दिनकर।
 
तुम जल वृष्टि आधार हो ,
चर-अचर जगत का सार हो ,
कुण्डिलिनी चक्र में व्याप्त हो,
सरमंडल करते राज हो,
भू पर प्रकाश बरसाने को 
झाँक रहा देखो दिनकर।
 
मैं तुच्छ जीव जीवित तुमसे ,
है प्रणव मंत्र मुखरित तुमसे ,
सृष्टि संचलन “ रीत “ तुमसे,
ऊसर धरा की "प्रीत " तुमसे
जीवन दिशा दिखाने को झाँक रहा देखो दिनकर।''

सादर आभार - रंगीला प्रदेश : प्रकाशनार्थ
सूर्य से ही सृष्टि का संचालन 
 
प्रीति दुबे ”कृष्णाराध्या”
इंदौर  मध्यप्रदेश
लेखक के बारे में
प्रीति दुबे
शिक्षिका (दिल्ली पब्लिक स्कूल, इंदौर).... और पढ़ें

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