biodatamaker

हिन्दी कविता : विधुर बाप

Updated: शनिवार, 29 अक्टूबर 2016 (17:14 IST)
विधुर बाप निर्बल, असहाय
बेचारा-सा होता है
है अगर छोटी-छोटी गुड़िया तो
किस्मत का मारा होता है
 
है अबोध, अनजान शिशु तो
मां जैसा ही दुलारा होता है
शीतल, सौम्य, स्नेहदायिनी
दुग्ध की पावन धारा होता है
 
बड़ी-बड़ी बेटियों के लिए तो
मर्यादा का रखवाला होता है
पथ भटके जब जवां लाड़लियां
तो सही राह दिख लाने वाला होता है
हो जाए विधुर यदि यौवनावस्था में
तो टूटे हुए तारे-सा होता है
कामेच्छाओं के सरोवर में बिना
पानी के मछली जैसा होता है
 
हो जाए विधुर चालीस के पार तो
कोई बात न करने वाला होता है
आवश्यकताओं की पूर्ति न होने पर
सागर में रेगिस्तान जैसा होता है
 
निःसहाय विधुर बहू बेटे के राज्य में
भंवर में पतवार खेने वाला होता है
दैनिक आपूर्ति के लिए तरसता 
केवल ऊपर वाला ही सहारा होता है
 
विधुरों जैसी हालत आज मेरे बुजुर्गों की
बहू-बेटे के होते भी दर-दर भटकते हैं
आज के बहू-बेटे, ले लो सबक
तुमको भी बुजुर्ग होना है
लेखक के बारे में
डॉ मधु त्रिवेदी
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

Teachers Day 2026: हर शिक्षक अपने विद्यार्थियों से कहना चाहता है ये 5 बातें, पढ़कर भावुक हो जाएंगे आप

Teachers Day 2026: दिल छू लेंगे ये 10 मोटिवेशनल कोट्स, अपने पसंदीदा टीचर को भेजकर बनाएँ उनका दिन खास

अगला लेख