Hanuman Chalisa

श्राद्ध पक्ष विशेष कविता : पिता

Written By WD
Updated: बुधवार, 7 सितम्बर 2016 (17:42 IST)
पिता का दाहसंस्कार कर 
घर के सामने खड़े होकर 
अपने पिता को पुकारने की प्रथा 
जो दाहसंस्कार में सम्मिलित होकर 
बोल रहे थे कि राम नाम सत्य है 
उन्हें हाथ जोड़कर विदा करने की विनती 
भर जाती आंखों में पानी 
वो पानी बढ जाता
गला रुंध जाता, तब 
जब तस्वीर पर चढ़ी हो माला 
और सामने जल रहा हो दीपक 
 
बचपन की स्मृतियां 
संग पिता आ जाती है मस्तिष्क पटल पर 
जो काम पिता कर लेते थे 
वो लोगों से पूछकर करना पड़ता 
 
हौंसला अफजाई 
और परीक्षा में पास होने पर 
पीठ थपथपाई भी गुम सी गई
अब में पास हुआ किंतु 
शाबासी की पीठ सूनी सी है 
 
और त्यौहार भी मुंह मोड़ चुके 
और रौशनी रास्ता भूल गई 
पकवान और नए कपड़े कैद हो गए पेटियों में 
 
इंतजार है श्राद पक्ष का 
पिता आएंगे पूर्वजों के संग 
धरती पर अपने लोगों से मिलने 
जब श्राद्ध में पूजन तर्पण 
और उन्हें याद करेंगे जब हम  
क्योंकि पिता जो थे वृक्ष की तरह 
पक्षियों का तो वे आसरा 
हमारे भी सहारा थे 
मगर आज हम है बेसहारा
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

कविता- तू ना हो तो...

भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में 6 बड़ी खामियां, आखिर कब होगा जरूरी सुधार?

लोकमान्य तिलक जयंती 2026: जीवन परिचय, इतिहास, महत्व और अनसुने तथ्य

Azad Jayanti 2026: जयंती विशेष: चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की ऐसी घटनाएं, जिन्हें हर युवा को जानना चाहिए

ब्रिटिश सरकार न सरस्वती प्रतिमा वापस करेगी, न कोहिनूर हीरा

अगला लेख