suvichar

हिन्दी कविता : पापा, आना सरहद पार से...

Updated: शनिवार, 21 अप्रैल 2018 (15:52 IST)
पापा, आना सरहद पार से,
दुश्मन के घरबार से।
 
रस्ता देखे थकी हैं अंखियां,
चुप हूं मेरी खो गई निंदिया।
सुन चिट्ठी तेरे नाम पे,
पापा, आना सरहद पार से।
 
दादी करे भगवान से बातें,
बूढ़े दादा यूं दिनभर खांसे।
बस तेरी फोटो थाम के,
पापा, आना सरहद पार से।
 
मां मेरी तो निष्प्राण पड़ी है,
छोटी बहन भी शून्य खड़ी है।
यूं हाथ कलेजा थाम के,
पापा, आना सरहद पार से।
 
पुरवइया फिर लोरी गा देंगी,
यादें हमारी मरहम रख देंगी।
हां, तेरी घायल चाम पे,
पापा, आना सरहद पार से।
 
मां कहती तू अब ना आएगा,
ना ही तेरा कोई शव आएगा।
हम बैठे तिरंगा थाम के,
पापा, आना सरहद पार से,
दुश्मन के घरबार से।
लेखक के बारे में
डॉ. निशा माथुर

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

अगला लेख