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नया साल लाए हैं

Updated: रविवार, 31 दिसंबर 2017 (18:08 IST)
फिर से पुराना साल बिदा कर
फिर से नया साल लाए हैं,
कुछ उम्मीदें और कुछ सपने
अबकी बार भी सजाए हैं...
 
जबकि दुनिया एक-दूजे पर
बम बरसाने लग गई
हर इक दिल में अब जबकि
दहशत-सी छाने लग गई
ऐसे में बरसाने हम कुछ,
श्रद्धा-सुमन ही लाए हैं
फिर से पुराना साल बिदा कर......
 
भूख मिटेगी रोटी की अब
कोई न भूखा सोएगा,
अपना नसीबा कोस-कोस
अब कोई कभी न रोएगा
हँसने के दिन आए हैं अब,
आँसू बहुत बहाए हैं
फिर से पुराना साल बिदा कर......
 
छोड़ दो ये खींचा-तानी सब
मिल-जुलकर सब काम करो,
इक-दूजे के दर्द को जानो
इक-दूजे से प्यार करो
फूल से भर दो उन राहों को,
जिनपे काँटे बिछाए हैं
फिर से पुराना साल बिदा कर...
लेखक के बारे में
दिनेश 'दर्द'

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