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महाराष्ट्र की राजनीति पर कविता : ओ मतदाता ! मत हो उदास ... !

Updated: सोमवार, 2 दिसंबर 2019 (16:15 IST)
अंततः मुबारक महाराष्ट्र को एक तिमुही सरकार।
एक राजनीतिक मंडप जिसके हैं तीन मुख्य द्वार ||
एक वाहन जिसके हैं तीन पहिए, अलग-अलग मेक व साइज़ के,
एक त्रिकोण जिसकी भुजा/कोण के अलग-अलग आकार || 1 ||
 
 
एक माह के हाई-टेंशन ड्रामें में देखी सबने सब दलों की तासीर।
महंगे होटलों में अलग-अलग हंडियों में पकती खीर ||
कितने हुए ज्वार भाटे, अपनों-अपनों के अंतरद्वंद्व।
शतरंजी चालें, बेशर्मी के अखाड़ी दाव-पेंच,
कभी जुड़ने, कभी टूटने (कभी रूठने, कभी मनाने) के अनिश्चय/आनंद || 2 ||
 
 
प्रजातंत्र की दुहाई, शिवाजी के नाम की गुहार।
अपनों की गुस्ताखी, परायों की मीठी मनुहार ||
क्रिकेट के टेस्ट-मैच सी, चढ़ती-उतरती स्कोर,
किसी का 'रन-आउट' होना और किसी का शतकीय प्रहार || 3||
 
 
ओ मतदाता! अब राजनीति के खेल की यही भावी शैली होगी।
राजनीति की गंगा दिन-दिन और अधिक मैली होगी।
अब यही सीरियल देखने हैं तुमको, हर चैनल पर हंसते-रोते ,
मत उदास होना (क्योंकि) आगे की राजनीति अब एक अबूझ पहेली होगी || 4 ||
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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