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कविता : भारतमाता का पुत्र

Updated: गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018 (15:36 IST)
मैं भारतमाता का पुत्र प्रतापी,
सीमा की रक्षा करता हूं।
जो आके टकराता है,
अहं चूर भी करता हूं।
 
दुश्मन की कोई भी,
दाल न गलती।
लड़कर दूर भगाता हूं,
अपने भारत के वीर गीत को,
हर मौके पर गाता हूं।
 
आतंकवादी अवसरवादी,
आने से टकराते हैं।
आ गए मेरी भूमि में,
तहस-नहस हो जाते हैं।
 
अपने देश की माटी का,
माथे पर तिलक लगाता हूं।

लेखक के बारे में
शम्भू नाथ

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