Hanuman Chalisa
✕

कविता : कृतज्ञता

Updated: शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018 (15:25 IST)
मेरे प्रभु
रहा संग तू
न मैं ये भूलूं, मेरे प्रभु
 
असमर्थता की निर्जीवता में
तू विश्वास के प्राण भरता रहा
निराशा के अंधेरों में अक्सर
टिमटिमाता, उजाला करता रहा
मगर जब रुक ही गए कदम
ली तलवार तूने लड़ा जंग तू
न मैं ये भूलूं, मेरे प्रभु
 
उतारा जिस भी समंदर में तूने
तैराकी के अंदाज़ सिखाता रहा
अड़चनों से लड़ना, बच कर निकलना
तू राहें नईं दिखाता रहा
उस समय जब डूब ही जाती देह
अचंभा, कि आया, तिनका बन तू
न मैं ये भूलूं, मेरे प्रभु
 
खेल खिलाए अनोखे अनोखे
हराता, सिखाता, जिताता रहा
परिश्रम तेरा और मेरा पताका
करे कभी भी न मोह भंग तू
न मैं ये भूलूं, मेरे प्रभु
 
मेरे प्रभु
रहा संग तू
न मैं ये भूलूं, मेरे प्रभु
लेखक के बारे में
श्रीमती गिरिजा अरोड़ा
स्वतंत्र लेखिका.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?

31 अक्टूबर पुण्यतिथि: इंदिरा गांधी की मृत्यु कब, कहां, क्यों और कैसे हुई थी?

वाणी साहित्य उत्सव का आगाज, पहले दिन युद्ध, स्त्री विमर्श और एआई के दौर में लेखन पर हुआ मंथन

वर्ल्ड स्ट्रोक डे: स्ट्रोक के लक्षण दिखते ही लें चिकित्सकीय सहायता, हर मिनट है कीमती

बौखलाए नेताओं की बेरहमी का ये सबसे निर्दयी उदाहरण है, 200 पेड़ों से हजारों परिंदों के आशियाने उजाड़कर मेट्रो चलाएंगे

अगला लेख