sundarkand

दुर्गा मां पर हि‍न्दी कविता

Updated: गुरुवार, 6 अप्रैल 2017 (13:01 IST)
यहां पर रखी मां हटानी नहीं थी
झूठी भक्ति उसकी दिखानी नहीं थी
 
चली आ रही शक्ति नवरात्रि में जब
जला ज्योति की अब मनाही नहीं थी
 
करे वंदना उसी दुर्गे की सदा जो
मनोकामना पूर्ण ढिलाई नहीं थी
 
चले जो सही राह पर अब हमेशा
उसी की चंडी से जुदाई नहीं थी
 
कपट, छल पले मन किसी के कभी तो 
मृत्यु बाद कोई गवाही नहीं थी
 
सताया दुखी को किसी को धरा पर
कभी द्वार मां से सिधाई नहीं थी
 
चली मां दुखी सब जनों के हरन दुख
दया के बिना अब कमाई नहीं थी
 
भवानी दिवस नौ मनाओ खुशी से
बिना साधना के रिहाई नहीं थी
लेखक के बारे में
डॉ मधु त्रिवेदी
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

ब्रिक्स से दूरी बांग्लादेश को पड़ेगी भारी, तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल होने पर संशय

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

अगला लेख