Hanuman Chalisa

दिवाली पर कविता : हे मां

Updated: शनिवार, 29 अक्टूबर 2016 (17:31 IST)
हे मां सीते, विनती है मेरी
घर दीवाली पर आ जाना
राम लखन बजरंगी सहित
जन-जन के उर बस जाना
 
हे मां सीते, मेरा हर धाम
चरणों में तेरे रोज बसता है
दि‍वाली की यह जगमगाहट
तेरे ही तेज से मिलती है
मां सीते, आकर उर मेरे 
प्यार फुलझड़ी जला जाना
हर जन को रोशन करके 
अंधेरा दिल का मिटा जाना
 
हे मां सीते! आशीष अपना
दुष्ट जनों पर बरसा जाना
बन कर दीप चाहतों का तुम
नवयौवन का अंकुर फूटा जाना
 
हे मां सीते, दिलों में आकर
लोगों को सब्र का पाठ पढ़ाना
जैसे तुम बसी हो उर राम के 
वैसे प्रिय प्रेम का दीप जला जाना
 
हे मां, लक्ष्मण प्रिय भक्त तेरे
भाव हर भाई में यह जगाना
न हो बंटवारा भाई -भाई में 
दीप वह जला मां तुम जाना 
 
हे मां सीते, खील-खिलौने की 
हर गरीब जनों पर बारिशें हो 
हृदय में मधु मिठास को घोल
शब्द शब्द को मधु बना जाना 
 
दीप जलते अनगिनत दीवाली पर
राकेट जैसे जाता है दूर गगन तक
जाति-पाति धर्म की खाई को पाट
सबके हृदय विशाल बना जाना
लेखक के बारे में
डॉ मधु त्रिवेदी
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

कविता- तू ना हो तो...

अगला लेख