Hanuman Chalisa

हिन्दी कविता : पतझड़ की एक कली...

Updated: सोमवार, 10 अप्रैल 2017 (14:07 IST)
मैं पतझड़ की एक कली, 
तुम चाहो तो खिल जाऊं।
पर ऐसी मेरी चाह नहीं, 
माले में गुंथी जाऊं।
 
एक यही बस अभिलाषा, 
मैं सबको गले लगाऊं।
मैं पतझड़ की एक कली,
तुम चाहो तो खिल जाऊं।
 
इन नन्ही-नन्ही कलियों संग, 
मैं झूम-झुमकर गाऊं।
उस विकल प्यार की आभा का, 
मैं सुन्दर राग सुनाऊं।
 
मोती मैं ना बनूं कभी, 
धागे में गुंथी जाऊं।
मैं पतझड़ की एक कली, 
तुम चाहो तो खिल जाऊं।
 
आंगन की किलकारी बन, 
मैं सबको अंग लगाऊं।
साथ मिले गर पत्थर का, 
तो उसको भी पिघलाऊं।
 
आंखों में हो शर्म-हया,
मैं सद्गुण ही अपनाऊं,
मैं पतझड़ की एक कली, 
तुम चाहो तो खिल जाऊं।
 
लेखक के बारे में
रामध्यान यादव 'ध्यानी'
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

Azad Jayanti 2026: जयंती विशेष: चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की ऐसी घटनाएं, जिन्हें हर युवा को जानना चाहिए

लोकमान्य तिलक जयंती 2026: जीवन परिचय, इतिहास, महत्व और अनसुने तथ्य

ब्रिटिश सरकार न सरस्वती प्रतिमा वापस करेगी, न कोहिनूर हीरा

बारिश में कुछ टेस्टी खाने का है मन? ट्राई करें ये 5 मानसून स्पेशल रेसिपीज

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

अगला लेख