biodatamaker

हिन्दी कविता : तुम बदल गई हो

Updated: शनिवार, 17 जून 2017 (14:47 IST)
सब कहते हैं - तुम बदल गई हो,
मैं तो वही हूं दबी, सहमी, सकुचाई सी
 
शायद सब मेरा चेहरा पढ़ते होंगे,
किसी ने मेरे "मैं" को नहीं पढ़ा होगा
 
ओ अतीत!! मैनें वादा किया था न!
कि जब मैं यादो पर सवार आऊंगी तुम्हारे पास,
 
तब मैं वही होऊंगी दबी, सहमी ,सकुचायी सी,
तुम मुझे पहचान लोगे,
 
मैंने अपने को वही रखा है बदले बिना
पर अब मैंने अपने को सजग कर लिया है,
 
खींच लाती हूं बार-बार अतीत से अपने आप को,
अपने आज में जीने के लिए
लेखक के बारे में
अंजू निगम
स्वतंत्र लेखिका.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

अगला लेख