Hanuman Chalisa

न शिकायत है, न ही रोए

Updated: शुक्रवार, 26 मई 2017 (12:59 IST)
ये उम्र तान करके सोए हैं,
थकान पांव-भर जो ढोए हैं।
 
किसी सड़क पे नहीं मिलती है,
सुबह जो गर्द में ये बोए हैं।
 
लोग कहते हैं कारवां चुप है,
सराय धुंध में समोए हैं।
 
नाव कब तक संभालते मोहसिम,
पहाड़ भी जहां डुबोए हैं।
 
रहन की छत है, ब्याज का बिस्तर,
न शिकायत है, न ही रोए हैं।
 
फफोले प्यार के निकल आए,
न जाने जिस्म कहां धोए हैं।
 
न कोई खौफ है अंधेरों से,
न कोई रोशनी संजोए है।
 
एक मुर्दा शहर-सा मौसम है,
एक मुर्दे की तरह सोए हैं।
 
ये कहानी कहीं छपे न छपे,
कलम की नोक हम भिगोए हैं।
प्रेम जी
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

रोजाना अपनाएं ये 10 जादुई आदतें, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर और चेहरे पर आएगा गजब का ग्लो

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

अगला लेख