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हिंदी गज़ल: बिन तेरे कोई ज़िन्दगानी नहीं है

Updated: रविवार, 21 मार्च 2021 (17:08 IST)
हो सबसे बेहतर मिरे लिए ,तिरा कोई सानी नहीं है ।
सुन मिरे अमीर !तिरे ज़ज्बातों का तर्जुमानी नहीं है !
चाहे हो बहार-ए-फ़िज़ा या फिर  ख़ुश्क खिज़ां का झड़ता मौसम ,
ऐसे ख़ुशपाश रक्खे मुझे, तिरे जैसा कोई दिलवर-ए-जानी नहीं है !
बिन बोले यूँ चुटकियों में पूरी करता तू मेरी ख्वाहिशें,
घूमे ये दिल आस-पास, बिन तेरे कोई ज़िन्दगानी नहीं है !
ज़मी पर ख़ुदा ने बना भेजा है, तुझे रहनुमा मिरा,
जैसे क़दर करे तू मिरी, वैसी कोई निगहबानी नहीं है !
मिरे लिए छलकती हुई आँखों में तिरा प्यार देखा है,
रूहानी हक़ीक़त है ये,फ़साना या कोई कहानी नहीं है !
 
स्वयं मैं ही-
डॉ.अंजना चक्रपाणि मिश्र
इंदौर,मध्यप्रदेश
लेखक के बारे में
डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र
स्वतंत्र लेखिका, संगीत, काव्य और साहित्य में अभिरुचि.... और पढ़ें

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