suvichar

हिन्दी गजल : मां की भक्ति...

Updated: गुरुवार, 6 अप्रैल 2017 (11:35 IST)
यहां पर रखी मां हटानी नहीं थी,
झूठी भक्ति उसकी दिखानी नहीं थी।
 
चली आ रही शक्ति नवरात्रि में जब,
जला ज्योति की अब मनाही नहीं थी। 
 
करे वंदना उसी दुर्गे की सदा जो,
मनोकामना पूर्ण ढिलाई नहीं थी।
 
चले जो सही राह पर अब हमेशा,
उसी की चंडी से जुदाई नहीं थी।
 
कपट-छल पले मन किसी के कभी तो,
मृत्यु बाद कोई गवाही नहीं थी।
 
सताया दुखी को किसी को धरा पर,
कभी द्वार मां से सिधाई नहीं थी।
 
चली मां दुखी सब जनों के हरन दुख,
दया के बिना अब कमाई नहीं थी,
 
भवानी दिवस नौ मनाओ खुशी से,
बिना साधना के रिहाई नहीं थी।
 
 
 
 
लेखक के बारे में
डॉ मधु त्रिवेदी
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!

स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

दादाजी की याद में पोती की पाती, पढ़कर आंखें भी नम होगी, उर्जा भी मिलेगी

क्यों मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस? जानिए इतिहास और इसका महत्व

अगला लेख