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कविता : कोयल रानी

Updated: शुक्रवार, 30 मार्च 2018 (14:41 IST)
कुहू-कुहू कर मीठे स्वर में,
हमें बुलाती
रानी।
अमराई में तान सुरीली,
उसकी लगती बड़ी सुहानी।।1।।
 
बौरों के सौंधी खशबू को,
चहुं दिशा में महकाती है।
रंग-बिरंगे पंछी के संग,
फुदक-फुदककर गाती है।।2।।
 
बगिया के सारे पंछी के,
मन को सचमुच हर लेती है।
ऋतुराज के इस मौसम में,
ढेरों खुशियां भर देती है।।3।।
लेखक के बारे में
डॉ. प्रमोद सोनवानी 'पुष्प'

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