Hanuman Chalisa

जब जनता पार्टी टूटी थी तो यह रचा था कवि अटल ने...

Updated: गुरुवार, 16 अगस्त 2018 (19:26 IST)
अटल बिहारी वाजपेयी की कविता : अभी चला दो कदम कारवां साथी छूट गया

हाथों की हल्दी है पीली
पैरों की मेहंदी कुछ गीली
पलक झपकने से पहले ही सपना टूट गया
 
दीप बुझाया रची दिवाली
लेकिन कटी न मावस काली
व्यर्थ हुआ आवाहन स्वर्ण सबेरा रूठ गया।
सपना टूट गया।
 
नियति नटी की लीला न्यारी
सब कुछ स्वाहा की तैयारी
अभी चला दो कदम कारवां साथी छूट गया।
सपना टूट गया।
 
* 1979 में जनता पार्टी के टूटने के बाद की मन:स्थिति में रचित।

ALSO READ: अटल जी की कविता : क्या खोया, क्या पाया जग में

ALSO READ: अटल बिहारी वाजपेयी : रग-रग हिन्दू मेरा परिचय

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

Teachers Day 2026: हर शिक्षक अपने विद्यार्थियों से कहना चाहता है ये 5 बातें, पढ़कर भावुक हो जाएंगे आप

Teachers Day 2026: दिल छू लेंगे ये 10 मोटिवेशनल कोट्स, अपने पसंदीदा टीचर को भेजकर बनाएँ उनका दिन खास

अगला लेख