ramcharitmanas

'फिल्लौरी' के नायक 'जलियांवाला बाग कांड' के सेनानी

Updated: सोमवार, 12 अगस्त 2019 (20:20 IST)
देश के ऐसे युवाओं को देश के प्रति जज्बा पैदा करने के लिए 13 अप्रैल 1919 की ऐतिहासिक व मर्मभेदी घटना को आत्मसात करना चाहिए। इस तारीख को यानी वैशाखी पर्व के दिन अमृतसर में जलियांवाला बाग में रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी।

इस सभा में युवाओं की फौज, बूढ़े और महिलाएं मौजूद थीं, लेकिन इस बाग से निकलने का एक ही रास्ता था। इस सभा को भंग करने के लिए अंग्रेज अफसर जनरल डायर ने बिना किसी सूचना के अंधाधुंध गोलियां चलवा दी, चूंकि रास्ता एक ही था बाहर निकलने के लिए और वह भी संकरा, इसलिए लोग भागने लगे और सभा में मार्मिक भगदड़ होने लगी। फायरिंग पर फायरिंग होती रही।

इन गोलियों के साथ-साथ बाग के कुएं में भी लोग जान बचाने के लिए कूदने लगे और मरने लगे। हजारों मरे, तो हजारों की संख्या में लोग जख्मी हुए। इन्हीं निरीह मृतकों में हिंदी फिल्म 'फिल्लौरी' के नायक भी थे। शहीदों को सादर श्रद्धांजलि।
यूरेका यूरेका 

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स

सावधान! थाली में रखा पनीर असली है या वेजिटेबल ऑयल से बना नकली? 2 मिनट के इस टेस्ट से जानें सच्चाई

कांवड़ यात्रा : ‘बोल बम’ का सनातन संदेश

भारत की विभिन्नताओं में समाहित है अटूट अभिन्नता!