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पुस्तक समीक्षा : दिलकश फूलों का एहसास करवाता है कविता संग्रह 'तोष'

बुधवार,अक्टूबर 28, 2020
Poetry collection Review
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किताब की शानदार कामयाबी को देखते हुए मंजुल प्रकाशन ने ‍हिंदी और मराठी भाषा में भी इसका प्रकाशन किया है। जबिक इसके गुजराती, तेलुगू और मलयालम संस्‍करण भी जल्‍दी ही आने वाले हैं।
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जब एक महामारी के कारण देश और दुनिया इतिहास की सबसे संकटपूर्ण स्थिति में फंसे हों और ऐसे समय समाज का कोई तबका अलग और उलट ढंग से पेश आए तो यह किसी भी सभ्य समाज और मजबूत सरकार के लिए नजरअंदाज करने वाली घटना नहीं है।
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मध्यप्रदेश के सुप्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक एवं प्रखर पत्रकार कृष्ण मोहन झा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के प्रथम कार्यकाल के दौरान लिखी गई थी। इस पुस्तक का शीर्षक था- यशस्वी मोदी।
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मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर की कुछ जिंदादिल महिलाओं की कहानी इन सबसे जुदा है। इन महिलाओं का लॉकडाउन कर्म सबसे ज्‍यादा सराहनीय रहा, सबसे ज्‍यादा काबि‍ल ए तारीफ है।
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बापू और हरिलाल दोनों अपनी जगह अच्छे थे, सच्चे थे, सही थे लेकिन परिस्थितियों के दंश ने एक सुयोग्य पुत्र को कंटीली राह पर धकेल दिया। जीवनभर पिता के प्रति पलते आक्रोश ने हरिलाल को पतन की राह पर धकेल दिया। जब सारा विश्व बापू को सम्मान के साथ अंतिम विदाई ...
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स्थूल का सूक्ष्म में रूपांतरण प्रकृति का अवरोही नहीं आरोही नियम है। यही है वास्तविक उद्मगमिता जिस से चेतना का लघुत्तम संप्रेषण होता है। यह नियम जिस काल अथवा अंतराल में पूर्णता को प्राप्त होकर जिस किसी
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चेतना भाटी का कहानी संग्रह 'जब तक यहां रहना है' जिसमें 27 कहानियां हैं। चेतना जी, जिन्होंने व्यंग्य, लघुकथाएं, उपन्यास भी लिखे हैं उनमें विधा के अनुरूप शब्द विन्यास को ढालने की कला है।
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'लोक-लय' हिन्दी की लोकप्रिय लेखिका और कवयित्री तृप्ति मिश्रा का पुस्तक रूप में उन पारंपरिक लोक गीतों का मधुर संचयन है, जो हमारे लोक मानस की अमूल्य धरोहर हैं।
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किताब में एक ही वक्‍त में जिंदगी के कई एंगल्‍स नजर आते हैं।
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1981 के आसपास लिखी गई इस किताब में एक संक्रमण का जिक्र है और इसे वुहान 400 का ही नाम दिया गया है। यानी आज से करीब 40 साल पहले उस वायरस के बारे में लिए किताब में जिक्र कर दिया गया था। एक अमेरिकी की यह कृति शुरु तो एक ऐसी मां से होती है जो अपने बच्चे ...
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर आज देश भर में अनेक समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नई दिल्ली में केंद्रीय इस्पात राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता फग्गनसिंह कुलस्ते ने ‌'महानायक मोदी' शीर्षक से प्रकाशित एक ...
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जसराज के जन्मते ही पिता पं. मोतीराम ने उन्हें शहद चटाया था। उनके घर में इसे घुट्टी पिलाना कहा जाता है। मां कृष्णा बाई का कहना था कि सभी बच्चों में से मोतीरामजी ने केवल जसराज को ही शहद चटाया था।
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एक ऐसा ही नाम है रूमा देवी जो हम सब को प्रेरि‍त कर रहा है। हस्तकला, हस्तशिल्प, लोककला को प्रोत्साहन को लेकर यह नाम आज सुर्खि‍यों में है।
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पटकथा लेखन बहुत ही श्रम साध्य काम है। यह इतना कठिन काम है कि आपको रस से लबालब भरे एक प्याले को हाथों में थामे एक नट की तरह रस्सी पर चलना है और मजाल है रस की एक बूंद भी छलक जाए।
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दिल्ली टोकियो तो नहीं बन पाता है, लेकिन इससे हजारों परिवारों का जीवन अंधकारमय बन जाता है।
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भारतीयता और भारत से प्रेम इन कहानियों में स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है।
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'एक पल ये भी' कहानियों का संकलन है। इसमें कुल 7 कहानियां हैं। लेखक ने बेहद ही मासूमियत से यह कहानियां लिखी हैं।
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चाचा चौधरी के जनक प्रसिद्ध कार्टूनिस्‍ट प्राण को देश में कौन नहीं जानता, लेकिन कोई प्राण के बेहद करीब रहने वाला उन पर कोई किताब लिखे तो जाहिर है दिलचस्‍पी बढ़ जाती है। कोई करीबी किताब लिखेगा तो उनके बारे में कई निजी बातें भी पता लगेंगी। ...
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“आपकी उंगलियों के निशान की तरह आपका दर्द भी आपके लिए अद्वितीय है। इसी बात को दूसरी तरह से कहें तो आप खुशी कहीं से भी खरीद सकते हैं, लेकिन आपकी उदासी खासतौर से सिर्फ आपके लिए बनी है, वो आपकी अपनी है”
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