प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते हैं

Last Updated: सोमवार, 18 जनवरी 2021 (14:08 IST)
प्लाज्मा दान करना एक आसान काम है जो विभिन्न रोगों के इलाज में मदद करता है। आइए जानते हैं क्‍या होता है प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन। इससे किसे फायदा होता है और क्‍यों यह बेहद जरुरी है?
प्लाज्मा हमारे खून की कुल मात्रा का लगभग 55 प्रतिशत है। दूसरा हिस्सा रेड ब्लड सेल्स, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स जैसी कोशिकाओं से बना है। इस तरल में एल्ब्यूमिन जैसे कई प्रोटीन होते हैं, जो शरीर में बहुत महत्वपूर्ण काम करते हैं।

प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन कई पैथोलोजी का इलाज कर सकता है, जैसे ब्लीडिंग या जलन। जानते हैं आखि‍र इसकी प्रक्रिया क्या है और रक्त दान करना इतना अहम क्यों है।

ब्लड प्लाज्मा क्या है?
प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा है, जो ब्लड सेल्स के साथ मिलकर लाल और सफेद और प्लेटलेट्स दोनों को बनाता है। जब इन दो हिस्सों को अलग किया जाता है, तो प्लाज्मा एक पारदर्शी तरल की तरह दिखता है।

प्लाज्मा लगभ 90 प्रतिशत पानी से बना होता है। हालांकि इसकी बाकी संरचना प्रोटीन और मिनरल साल्ट का मिश्रण होती है जो शरीर के ठीक से कामकाज के लिए जरूरी हैं।

सबसे पहले इसमें इम्युनोग्लोबुलिन होते हैं, जो इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं और आपको संक्रमण से बचाने में मदद करते है। इसके अलावा एल्बुमिन भी है, जो वह अणु है जो कुछ पदार्थों को टिशू तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है।

उसी तरह यह ध्यान रखना अहम है कि प्लाज्मा में कोगुलेशन फैक्टर भी होते हैं। यह वह है जो शरीर में कहीं रक्तस्राव होने पर रक्त का थक्का जमने में मदद करता है।

कैसे काम करता है?
प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन बहुत सरल प्रक्रियाएं हैं। सबसे पहले एक डोनर चाहिए। यदि आप डोनेट करना चाहते हैं, तो यह एक परोपकारी और निस्वार्थ काम है। यहां नर्स ब्लड डोनर से खून लेगी जिसमें आमतौर पर 30 से 45 मिनट के बीच लगता है।

रक्त लेने के बाद ब्लड सेल्स प्लाज्मा से अलग हो जाती हैं। फिर वे तरल को प्रीजर्व और स्टोर करते हैं। जब सिर्फ प्लाज्मा डोनर की बात आती है, तो इसे प्लास्मफेरेसिस कहा जाता है।

इसमें परवर्ती वाला ब्लड डोनेशन से अलग होता है जिसमें निकाली गयी सेल्स को वापस खून में पहुंचा दिया जाता है, और वे सिर्फ प्लाज्मा को रखते हैं। इसके अलावा रिकवरी भी जल्दी होती है और आप हर पंद्रह दिनों में डोनेशन कर सकते हैं।

इसके अलावा यह ध्यान रखना अहम है कि प्लाज्मा डोनेट करने के लिए डोनर और रिसीवर का ब्लड टाइप समान होना चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि प्लाज्मा में वे प्रोटीन होते हैं जो शरीर को दान किए गए खून को रिजेक्ट कर सकते हैं।

किसके लिए है प्लाज्मा ट्रांसफ्यूजन
डॉक्टरों को प्लाज्मा आधान करने के कई कारण हैं। उदाहरण के लिए, जब किसी को जलने या गंभीर दुर्घटना का सामना करना पड़ा है, तो प्लाज्मा आधान रक्त को खोई मात्रा वापस पाने में मदद करता है। चूंकि प्लाज्मा में क्लॉटिंग कारक होते हैं, इसलिए यह तकनीक अधिक तेज़ी से रक्तस्राव को रोकना संभव बनाती है। वास्तव में, यह उन लोगों में विशेष रूप से उपयोगी है जो हेमोफिलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, इनमें से किसी भी कारक की कमी के कारण।



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