biodatamaker

रेशम के कीड़ों का बुना पर्दा, दूर करेगा बहरापन

Updated: सोमवार, 29 मई 2017 (17:55 IST)
मेलबर्न, 29 मई :भाषा: सुनने की क्षमता लौटाने और इसमें सुधार करने के लिए वैज्ञानिकों ने पहली बार रेशम के कीड़ों का इस्तेमाल किया है।
 
क्रॉनिक मिडिल ईयर डिसीज और कान का पर्दा फटने जैसी समस्याओं से दुनियाभर में लाखों लोग पीड़ित हैं। इनसे पीड़ित लोगों की सुनने की क्षमता तो प्रभावित होती ही है, संक्रमण जैसी कई जटिलताएं भी हो जाती हैं जिनसे हर वर्ष 30,000 लोगों की मौत हो जाती है।
 
अब वैज्ञानिक कान का पर्दा फटने जैसी तकलीफदेह समस्या को दूर करने और सुनने की क्षमता लौटाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने विज्ञान और रेशम के कीड़ों की मदद से एक छोटा सा उपकरण ईजाद किया है जिसका नाम है क्लियरड्रम। यह दिखने में और आकार में कॉन्टैक्ट लैंस की तरह है।
 
मार्कस एटलस के नेतृत्व में ईयर साइंस इंस्टिट्यूट ऑस्ट्रेलिया की टीम ने ऐसा सिल्क इंप्लांट बनाया है जिस पर मरीज की अपनी कोशिकाएं विकसित हो सकती हैं। इससे कान के पर्दे में सुधार आ जाता है।
 
कई वषरें के परीक्षण के बाद इंप्लांट ने व्यक्ति के कान के असली पर्दे के मुकाबले और बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता प्रदर्शित की है।
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

भारत के राष्ट्र-निर्माता और इंजीनियरिंग के मसीहा: सर एम. विश्वेश्वरैया

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

80s retro look trend : 80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

हिंदी दिवस 2026: हिंदी नहीं रही अब पहले जैसी, फिर भी दुनिया में बढ़ता जा रहा इसका दबदबा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कृष्ण मोहन झा की किताब "डा मोहन भागवत संदेश" का विमोचन

अगला लेख