Health Care Tips : कोरोना से भी बड़े खतरे मौजूद हैं, जानिए 10 बड़ी बीमारियां

कोरोना काल में हर किसी कि जुबां पर कोरोनावायरस का ही नाम है। लेकिन कोरोना के अलावा भी ऐसे बड़े खतरे मौजूद हैं, जो हर साल लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं। इन बीमारियों के बारे में जानकारी के प्रति जागरूक होने के लिए जरूरी है। आइए हम उन बीमारियों के बारे में जानें जिससे दुनियाभर में सबसे ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही जानें बचाव के तरीकों के बारे में...

ट्यूबरक्युलोसिस या टीबी यह फेफड़ों की बीमारी है जिसका कारण बैक्टीरिया होता है। हालांकि अब इस बीमारी का इलाज संभव है लेकिन गंभीर परिस्थिति तक व्यक्ति न पहुंचे, यह भी आवश्यक है।

बचाव के तरीके
टीबी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है BCG वैक्सीन लगवाना।

2. डायबिटीज

सिर्फ एक बीमारी नहीं हैं बल्कि यह कई बीमारियों का समूह है जिसमें शरीर में इंसुलिन प्रभावित होता है। टाइप 1 और 2 दोनों ही तरह की डायबिटीज में शरीर में मौजूद पैन्क्रियाज इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है जिससे शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है।
कैसे करें बचाव

डायबिटीज को सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है और इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करना है, वॉक करना है, साथ ही पोषक तत्व से भरपूर डाइट में करें।

3. या डायरिया

अगर दस्त की समस्या बनी रहे तो शरीर में पानी और नमक की कमी होने लगती है जिससे डिहाइड्रेशन हो जाता है। यह समस्या इतनी गंभीर है कि व्यक्ति की जान पर भी बन आती है। डायरिया ज्यादातर केसों में किसी वायरस या बैक्टीरिया की वजह से होता है, जो शरीर में प्रवेश खराब खाने या खराब पानी की वजह से होता है।
कैसे करें बचाव?

यूनिसेफ के अनुसार डायरिया से बचाव के लिए सबसे जरूरी है साफ-सफाई का ख्याल रखना, हाथों को साफ रखना, खाने से पहले अच्छी तरह हाथ धोना और साफ पानी पीना।

4. लिवर सिरोसिस

लिवर को यदि लंबे समय तक नुकसान पहुंचता है तो उसे सिरोसिस कहते हैं। लीवर सिरोसिस का मतलब सिकुड़ना होता है। ऐसा मुख्य रूप से शराब का सेवन करने व खराब भोजन करने के कारण होता है। इस बीमारी से बचने के लिए लिवर सिरोसिस का सही समय पर इलाज जरूरी है।
सिरोसिस से बचने के लिए जरूरी है लिवर को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से दूर रहना, ज्यादा शराब का सेवन न करना। हेल्दी डाइट व पौष्टिक आहार को अपनी डाइट में शामिल करें। अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज करवाएं।

5. ऐल्टशाइमर्स डिजीज

ऐल्टशाइमर्स में व्यक्ति की याददाश्त को नुकसान पहुंचता है। सामान्य मानसिक क्रियाओं में भी रुकावट आती है।

बचाव के तरीके
इस बीमारी से बचने के लिए हेल्दी डाइट का सेवन करना जरूरी है। सबसे जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

6. रेस्परेट्री कैंसर

रेस्परेट्री कैंसर यानी श्वास संबंधी कैंसर। इसके होने की 2 मुख्य वजहें होती हैं- पहला धूम्रपान और दूसरों के धूम्रपान की वजह से निकलने वाले धुएं में सांस लेना (पैसिव स्मोकिंग) और दूसरा वातावरण में मौजूद जहरीले कण।

बचाव के तरीके
फेफड़ों के कैंसर से बचने के लिए जरूरी है कि धूल-धुएं और तम्बाकू से दूर रहा जाए।

7. ब्रेन स्ट्रोक

दिमाग के किसी भाग में ब्लड न पहुंचना, बाधित होना या कम होना। दिमाग में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी की वजह से ब्लड क्लॉटिंग की वजह से क्रियाएं बाधित यानी उसमें रुकावट आने लगती है और दिमाग अपना नियंत्रण खो देता है जिसे स्ट्रोक कहते हैं। यदि इसका इलाज सही समय पर न किया जाए तो दिमाग हमेशा के लिए डैमेज भी हो सकता है और व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
बचाव के तरीके

अपने डॉक्टर की सलाह लेते रहें। दिनचर्या में सही बदलाव करें। अपने ब्लडप्रेशर को कंट्रोल में रखें, साथ ही नियमित रूप से व्यायाम करते रहें और पौष्टिक आहार का सेवन करें।


8. कोरोनरी आर्टरी डिजीज

सबसे घातक बीमारी
कोरोनरी आर्टरी डिजीज है। इस बीमारी ने लाखों लोगों कि जान ली। कोरोनरी आर्टरी डिजीज में हृदय तक खून पहुंचाने वाली रक्त नलिकाएं संकुचित हो जाती हैं जिस वजह से चेस्ट पेन और हार्ट फेल जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बचाव के तरीके
खान-पान का ख्याल रखना जरूरी है, बैलेंस्ड डाइट का होना आवश्यक है, एल्कोहोल, स्मोकिंग से बचें।

9. लोअर रेस्परेट्री
लोअर रेस्परेट्री इंफेक्शन में यह शरीर के वायु-मार्ग और फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित करता है जिसकी वजह से फ्लू, निमोनिया हो सकता है।
बचाव के तरीके
साफ-सफाई का ख्याल रखें। नियमित रूप से हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह से धोएं। और संक्रमण से दूर रहें। अपने डॉक्टर की सलाह लेते रहे।

10. क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज
क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिजीज फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह फेफड़ों से जुड़ी लॉन्ग टर्म बीमारी है इस बीमारी में व्यक्ति को
सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
बचाव के तरीके
स्मोंकिग से बचें और अपने डॉक्टर की सलाह मानें



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