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ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट ने दी दस्‍तक, Expert से जानें कितना खतरनाक है और क्‍या सावधानी बरतें

Updated: सोमवार, 24 जनवरी 2022 (16:35 IST)
कोरोना वायरस से पूरी दुनिया में तबाही का मंजर अभी खत्म नहीं हुआ है। वहीं अब ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट बीए.2 BA.2 का पता चला है।जिसे खतरनाक बताया जा रहा है। ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों ने ओमिक्रॉन के इस सब वेरिएंट से जुड़ें सैकड़ों मामलों की पहचान की है। यूके स्वास्थ्य एजेंसी ने बढ़ते मामलों को देखते हुए जांच के बाद इसे बीए.2 वैरिएंट नाम दिया है। ब्रिटेन में इस वैरिएंट के 400 से अधिक केस सामने आए है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस नए सब-वैरिएंट पर विश्लेषण की जरूरत है। आइए जानते हैं सब नए वैरिएंट के बारे में -

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ओमिक्रॉन को वैरिएंट ऑफ कंसर्न घोषित किया है। WHO के मुताबिक इसका सब वैरिएंट बीए.2 और ओमिक्रॉन में बहुत अधिक अंतर नहीं है।

UKSHA के विशेषज्ञों के मुताबिक महामारी के कारण नए वैरिएंट और भी उभर सकते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि फिलहाल कोई भी पर्याप्त सबूत नहीं है कि यह सब वैरिएंट पुराने से अधिक खतरनाक है या नहीं?

इधर, फ्रांसीसी महामारी विज्ञानी एंटोनी फ्लेहॉल्‍ट ने डेनमार्क में बताया कि ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। लंंदन के वायरोलॉजिस्ट टॉम पीकॉक ने बताया कि, 'भारत और डेनमार्क में मिले इस नए सब वैरिएंट और मौजूदा ओमिक्रॉन के बहुत अंतर नहीं है। हालांकि अभी पर्याप्त सबूत नहीं होने पर पूर्ण रूप से ये नहीं कहा जा सकता कि यह कितना खतरनाक है। हालांकि सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है।  

इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोमिक कंसोर्टियम (INSACOG) ने आधिकारिक तौर पर रविवार को बुलेटिन में कहा है कि भारत में ओमिक्रॉन वेरिएंट सामुदायिक संक्रमण के स्तर पर है और जिस भी क्षेत्र में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं वहां पर यह तेजी से फैल रहा है।

आइए जानते हैं एक्‍सपर्ट की राय -  

डॉ. विनोद भंडारी, SAIIMS कॉलेज के चेयरपर्सन, इंदौर ने बताया कि ओमिक्रॉन के नए सब वैरिएंट में अब लंग्‍स पर पर प्रभाव पड़ने लगा है। इंदौर में मिले संक्रमित मरीजों में 15 से 50 फीसदी तक 5 लोगों के लंग्‍स पर असर पड़ा है। वहीं एक 17 साल के बच्चे में 40 से 50 फीसदी तक लंग्‍स पर नए वैरिएंट का असर दिखा है। पहले ओमिक्रॉन लंग्स को प्रभावित नहीं करता था लेकिन अब उस पर भी असर होने लगा है। इससे ठीक होने में 8-10 दिन का वक्त लग सकता है। लोग प्रोटोकॉल फॉलो नहीं कर रहे हैं इसलिए भी केस बढ़ रहे हैं। साथ ही हेल्थ वर्कर उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द बूस्‍टर डोज लगवाना चाहिए। वहीं इंदौर में 1 से 17 साल तक के बच्चों में भी ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट पाए गए। ऐसे में वैक्सीन नहीं लगने वालों को लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

को-मोरबिडिटी वाले मरीज अपनी सेहत का ख्‍याल रखें। सभी जरूरी दवाओं को वक्त पर लें। अपनी डाइट में हाई प्रोटीन शामिल करें।

डॉ सलील भार्गव, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर, इंदौर ने बताया कि, 'ओमिक्रॉन के सब वैरिएंट के लक्षण फिलहाल वह URTI(Upper Respiratory Tract Infection) यानी ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण है को प्रभावित कर रहा है, साथ ही निमोनिया से पीड़ित लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। फिलहाल इस वैरिएंट के बारे में अभी बहुत कुछ पता नहीं चला है आने वाले वक्त के साथ ही पता चलेगा।

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