Hanuman Chalisa

डेंगू के लिए जरूरी टेस्ट, आपको पता होना चाहिए...

Written By WD
Updated: गुरुवार, 4 अगस्त 2016 (11:57 IST)
डेंगू एक ऐसा बुखार है, जो ठहरे हुए पानी में पैदा हुए मच्छरों के काटने पर होता है, और इन्हीं के द्वारा यह रोग एक इंसान से दूसरे को संक्रमित करता है। यदि डेंगू पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद कोई मच्छर आपको काटता है, तो आपको भी डेंगू हो सकता है। डेंगू से बचने के लिए सतर्कता रखना और बचाव के उपाय करना आवश्यक है। डेंगू के लक्षण महसूस करने के बाद इसकी जांच करना भी बेहद आवश्यक है। इसके लिए आपको यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए - 
 
 
एनएस 1 - एनएस 1 टेस्ट डेंगू के लक्षण सामने आने पर शुरूआती पांच दिनों के अंदर किया जाना चाहिए, ताकि इसके सार्थक और सटीक परिणाम प्राप्त हो सके। शुरूआती 5 दिनों के अंदर डेंगू के लक्षण होने पर यह जांच करवाना चाहिए, ताकि डेंगू की उपस्थ‍िति को बेहतर तरीके से जाना जा सके। इसके बाद इस टेस्ट को करवाने पर परिणाम गलत भी सामने आ सकते हैं। एनएस1 टेस्ट प्रारंभिक 5 दिनों के भीतर बीमारी का पता लगाने में सक्षम होता है, लेकिन इसके अलावा इसके परिणामों की प्रमाणिकता संदेहास्पद होती है।

अगर आप यह जांच देरी से करवाते हैं, तो यह जरूरी नहीं है, कि इसके परिणामों में डेंगू बुखार की पुष्टि हो। कई बार ऐसी स्थ‍ितियां भी बनती है, जब मरीज को डेंगू होते हुए भी समय पर जांच नहीं करवाने के कारण गलत परिणाम सामने आते हैं और डेंगू की पुष्टि नहीं हो पाती। ऐसे में मरीज डेंगू का सामना जरूर करता है, लेकिन उसे सही इलाज नहीं मिल पाता और उसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जाती है।
 एलाइजा - डेंगू के लिए की जाने वाली यह एक ऐसी जांच है, जिसमें डेंगू की पुष्टि प्रमाणिक रूप से हो जाती है, जिससे डॉक्टर्स को मरीज का बेहतर तरीके से इलाज करने में आसानी होती है। एलाइजा टेस्ट में आईजीएम डेंगू के लक्षण सामने आने के लगभग 3 से 5 दिन के अंदर व आईजीजी  5 से 10 दिन के अंदर होता है। इसके परिणामों में सटीकता, जांच के समय पर आधारित होती है। मतलब समय रहते जांच करवाने पर डेंगू की पुष्ट‍ि प्रमाणिक हो जाती है और इलाज भी बेहतर होता है। 
 
डेंगू के अधिकांश मामलों में डॉक्टर्स एनएस1 टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इसका प्रमुख कारण है कि यह टेस्ट शुरूआती 5 दिनों में ही करवाया जाता है, जबकि एलाइजा टेस्ट में अधिक समय लगता है। ऐसे में मरीज अधिक समय तक इंतजार करने के बजाए, एनएस1 करवाना ही बेहतर समझते हैं। हालांकि एलाइजा टेस्ट के परिणाम एनएस1 की अपेक्षा अधिक प्रमाणिक होते हैं। 
 
लेकिन डेंगू की जांच कराने के बाद परिणाम का इंतजार करने के स्थान पर लक्षणों के आधार पर प्राथमिक इलाज शुरू कर दिया जाना चाहिए। अन्यथा मरीज की हालत बिगड़ भी सकती है।
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

आस्था की विजय: जब पंढरपुर में एक बालक के रक्षक बने स्वयं विट्ठल

मैं गीत बन अधरों पर आऊंगा

NEET Controversy: छात्रों की आड़ में अराजकता फैलाने की साजिश

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

अगला लेख