Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

सुबह उठते ही कर लें ये 5 काम, दिनभर रहेंगे फ्रेश...

नींद पूरी हो न हो, सुबह की शुरुआत अगर ताजगी से भरी न हो, तो दिन भर एक्ट‍िव बने रहना जरा मुश्किल होता है। लेकिन इन 5 तरीकों से आपकी सुबह बन सकती है ताजातरीन, और आप सुपरएक्ट‍िव...
 
1 ठंडा पानी - सुबह नींद से जागने के बाद सिर्फ 1 गिलास ठंडा पानी पीना, सुस्ती को भगा देता है और मस्तिष्क की कोशिकाओं को रिफ्रेश कर उन्हें एक्ट‍िव करने में मदद करता है। इससे आप तरोताजा महसूस करते हैं, सो अलग। 
 
2 स्ट्रेचिंग - अपनी सुबह को सक्रिय और ताजगीभरा बनाने का सबसे बेहतरीन और हेल्दी तरीका है स्ट्रेचिंग। यह आपके रक्त संचार को बेहतर करके मस्तिष्क तक रक्त के बहाव को सही तरीके से पहुंचाता है, जिससे दिमाग सतर्क और सक्रिय रहता है।
 
3 प्रोटीन - प्रेाटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन सुबह नाश्ते में जरूर करें। यह आपके मस्तिष्क को सक्रिय बनाए रखने और ऊर्जा का संचार करने में बेहद मददगार है।
 
4 नहाना - नहाने के लिए ठंडे पानी का उपयोग करें, यह पूरा दिन शरीर में ताजगी बनाए रखने के लिए सहायक होगा। वहीं गर्म या गुनगुने पानी से स्नान आपको आरामदायक मानसिक स्थिति में रखता है, जिससे आप निरंतर सक्रिय नहीं होते।
 
5 ग्रीन टी - दूध और शकर वाली फैटी चाय की जगह, ग्रीन टी का सेवन शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए ऊर्जादायक होगा। दिनभर एक्टिव और तरोताजा रहना चाहते हैं, तो सुबह की शुरुआत इस चाय से करें।
 

Show comments

सभी देखें

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

बारिश के मौसम में जरूर पिएं ये 5 हेल्दी ड्रिंक्स, शरीर को देंगे इम्युनिटी, एनर्जी और अंदरूनी गर्माहट

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय, मच्छरों से ऐसे करें खुद की सुरक्षा

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

सभी देखें

घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

Daily Vastu Tips: घर में हर दिन खुश रहना है तो आज ही अपनाएं ये सरल वास्तु टिप्स

पुण्यतिथि विशेष: स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय और खास बातें

तीखा सामाजिक-आर्थिक व्यंग्य: दो जून की रोटी

अगला लेख