श्री तुलसी मानस मंदिर हरिद्वार, जिसकी दीवारों पर अंकित है रामचरितमानस की चौपाइयां

Shri Tulsi Manas Mandir haridwar
अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021 (17:27 IST)
उत्तराखंड प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के सात पवित्र स्थानों में से एक है। हरिद्वार में हर की पौड़ी को ब्रह्मकुंड कहा जाता है। इसी विश्वप्रसिद्ध घाट पर कुंभ का मेला लगता है और यहीं पर विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती होती है। आओ जानते हैं यहां के प्रसिद्ध राम मंदिर तुलसी मानस मंदिर के बारे में संक्षिप्त जानकारी।

1. माता वैष्णोदेवी गुफा मंदिर के पास ही भूमा निकेतन बना हुआ। यहां के पवित्र स्थल पर हमें 108 शालिग्राम देखने को मिलते हैं। उसके आगे ही तुलसी मानस राम मंदिर है। वैष्णो देवी का मंदिर भारत माता मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। भारत माता का मंदिर सप्त सरोवर क्षेत्र अर्थात सप्त ऋषि आश्रम के पास स्थित है। कुम्भ नगरी हरिद्वार में सप्त सरोवर मार्ग पर स्थित मंदिरों की श्रृंखला के बीच स्तिथ है तुलसी मानस मंदिर। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन से करीब 6 किमी देहरादून हाईवे पर यह भूपतवाला के पास है।
2. भूमा निकेतन से थोड़ा आगे चलते ही आपको सफेद संगमरमर से बना एक भव्य मंदिर दिखाई देगा, जोकि भगवान श्री राम का है। इस भव्य मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है। यहां की शानदार नक्काशी और मंदिर के बड़े-बड़े झूमर मंदिर की भव्यता में चार चांद लगा देते हैं।

3. इस मंदिर की दीवारों पर रामचरितमानस चौपाइयां अंकित है। तुलसी मानस मंदिर न सिर्फ अपनी स्थापत्य कला के लिए बल्कि शिल्प और वस्तु कला के साथ ही ग्रेनाइट पत्थरों पर अंकित रामचरित मानस की चौपाइयों के कारण न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है।

4. मंदिर का निर्माण मानस परमहंस की उपाधि प्राप्त जून आखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री अर्जुन पुरी जी महाराज ने करवाया था। उत्तराखंड के हरिद्वार में संभवत: वर्ष 1991 में इस मंदिर की स्थापना हुई थी। तुलसी मानस मन्दिर का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सिंह ने किया था।

5. मंदिर के अंदर आप राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की सुंदर मूर्ति देख सकते हैं। मंदिर में पंचदेवों की स्थापना भी की गई है। श्री राम दरबार सहित श्री गणेश, श्री राधा कृष्ण, माँ दुर्गा, श्री हनुमान एवं भोलेनाथ श्री नर्मदेश्वर रूप में विराजमान हैं।



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