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हनुमानजी के किस मंत्र-पाठ से मिलता है क्या लाभ, जानिए

Written By WD
Updated: बुधवार, 1 अप्रैल 2015 (12:51 IST)
श्रीरामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस लिखने से पहले हनुमान चालीसा लिखी थी और फिर हनुमान की कृपा से ही वे श्रीरामचरित मानस लिख पाए।

हनुमान चालीसा को ध्यान से पढ़ने और समझने के बाद पता चलेगा कि हनुमान ही इस कलियुग के जागृत देवता हैं, जो भक्तों के सभी तरह के कष्ट को दूर करने के लिए तुरंत ही प्रसन्न हो जाते हैं। शर्त यह है कि भक्त का अपने कर्मों के प्रति सजग रहना जरूरी है। कुकर्मी का साथ तो कोई नहीं देता। हम बताते हैं कि हनुमानजी की कौन-सी साधना से किस तरह के कष्ट मिट जाते हैं। 
 
हनुमान चालीसा पढ़ते रहने से इस संकट से बचा रहता है व्यक्ति... अगले पेज पर...
हनुमान चालीसा : जो व्यक्ति नित्य सुबह और शाम हनुमान चालीसा पढ़ता रहता है उसे कोई भी व्यक्ति बंधक नहीं बना सकता। उस पर कारागार का संकट कभी नहीं आता।

यदि किसी व्यक्ति को अपने कुकर्मों के कारण कारागार (जेल) हो गई है, तो उसे संकल्प लेकर क्षमा-प्रार्थना करना चाहिए और आगे से कभी किसी भी प्रकार के कुकर्म नहीं करने का वचन देते हुए हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें। हनुमानजी की कृपा हुई तो कारागार से ऐसे व्यक्ति मुक्त हो जाते हैं।
 
अगले पन्ने पर... बजरंग बाण बचाता है इस संकट से..
बजरंग बाण : बहुत से व्यक्ति अपने कार्य या व्यवहार से लोगों को रुष्ट कर देते हैं, इससे उनके शत्रु बढ़ जाते हैं। कुछ लोगों को स्पष्ट बोलने की आदत होती है जिसके कारण उनके गुप्त शत्रु भी होते हैं। यह भी हो सकता है कि आप सभी तरह से अच्छे हैं फिर भी आपकी तरक्की से लोग जलते हो और आपके विरुद्ध षड्‍यंत्र रचते हो।

ऐसे समय में यदि आप सच्चे हैं तो श्री बजरंग बाण आपको बचाता है और शत्रुओं को दंड देता है। बजरंग बाण से शत्रु को उसके किए की सजा मिल जाती है, लेकिन इसका पाठ एक जगह बैठकर अनुष्ठानपूर्वक 21 दिन तक करना चाहिए और हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि हनुमानजी सिर्फ पवित्र लोगों का ही साथ देते हैं। 21 दिन में तुरंत फल मिलता है।
 
अगले पन्ने पर, किस संकट से बचाता है हनुमानबाहुक का पाठ...
हनुमान बाहुक : यदि आप गठिया, वात, सिरदर्द, कंठ रोग, जोड़ों का दर्द आदि तरह के दर्द से परेशान हैं, तो जल का एक पात्र सामने रखकर हनुमान बाहुक का 26 या 21 दिनों तक मुहूर्त देखकर पाठ करें।


प्रतिदिन उस जल को पीकर दूसरे दिन दूसरा जल रखें। हनुमानजी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ाओं से आपको मुक्ति मिल जाएगी।
 
इस हनुमान मंत्र से मिट जाता है हर तरह का भय... अगले पन्ने पर..
हनुमान मंत्र : यदि आप अंधेरे, भूत-प्रेत से डरते हैं या किसी भी प्रकार का भय है तो आप 'हं हनुमंते नम:' का 108 बार जप करके सो जाएं। रात को सोने से पूर्व हाथ-पैर और कान-नाक धोकर पूर्वाभिमुख होकर यह मंत्र जपें। 


 


कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे आपमें निर्भीकता का संचार होने लगेगा।
 
अगले पन्ने पर... यदि गृह कलह से हैं परेशान तो यह उपाय करें...
हनुमान मंदिर : प्रति मंगलवार एवं शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर गुड़ और चना अर्पित करें और घर में सुबह-शाम हनुमान चालीसा का पाठ करें। पाठ करने के पहले और बाद में आधे घंटे तक किसी से बात न करें।


जब 21 दिन पूरे हो जाएं तो हनुमानजी को चोला चढ़ाएं। हनुमानजी तुरंत ही घर में सुख-शांति कर देंगे।
 
अगले पन्ने पर, यदि शनि ग्रह से हैं परेशान तो यह उपाय करें...
शनि ग्रह पीड़ा से मुक्ति : हनुमानजी की जिस पर कृपा होती है, उसका शनि और यमराज भी बाल बांका नहीं कर सकते। आप शनि ग्रह की पीड़ा से छुटकारा पाना चाहते हैं कि प्रति मंगलवार हनुमान मंदिर जाएं और शराब व मांस के सेवन से दूर रहें।


इसके अलावा शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा पाठ करने से शनि भगवान आपको लाभ देने लगेंगे।
 
अगले पन्ने पर... हनुमानजी का चमत्कारिक शाबर मंत्र... 
हनुमानजी का शाबर मंत्र : हनुमानजी का शाबर मंत्र अत्यंत ही सिद्ध मंत्र है। इसके प्रयोग से हनुमानजी तुरंत ही आपके मन की बात सुन लेते हैं। इसका प्रयोग तभी करें जबकि यह सुनिश्चित हो कि आप पवित्र व्यक्ति हैं। यह मंत्र आपके जीवन के सभी संकटों और कष्टों को तुरंत ही चमत्कारिक रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है। हनुमानजी के कई शाबर मंत्र हैं तथा अलग-अलग कार्यों के लिए हैं। यहां प्रस्तुत हैं दो मंत्र।

शाबर अढाई मंत्र :-
 
॥ ॐ नमो आदेश गुरु को, सोने का कड़ा,
तांबे का कड़ा हनुमान वन्गारेय सजे मोंढे आन खड़ा ॥
 
शाबर मंत्र :-
 
ॐ नमो बजर का कोठा,
जिस पर पिंड हमारा पेठा।
ईश्वर कुंजी ब्रह्म का ताला,
हमारे आठो आमो का जती हनुमंत रखवाला।
 
चेतावनी : उक्त मंत्र के साधना के नियम, समय, स्थान और मंत्र जाप की संख्‍या और दिन को किसी योग्य पंडित या साधु से जानकर ही जपें।
 
 
(वेबदुनिया डेस्क)
(समाप्त) 

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