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गुजरात विधानसभा में ऐतिहासिक UCC बिल पारित, अब शादी, तलाक और लिव-इन पर सख्त कानून

Updated: बुधवार, 25 मार्च 2026 (09:08 IST)
गुजरात विधानसभा के लिए 24 मार्च, 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा, जहां समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस बिल पर सदन में लगभग साढ़े सात घंटे तक मैराथन चर्चा चली। इस बिल के पारित होने के साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जिसने अपने राज्य में समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है।
 

विवाह और तलाक के लिए समान कानूनी ढांचा

इस बिल में विवाह और तलाक को लेकर बेहद महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अब से सभी धर्मों के लिए विवाह का पंजीकरण (Registration) 60 दिनों के भीतर कराना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो 10,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, अदालत की अनुमति के बिना दिए गए किसी भी प्रकार के तलाक को अवैध माना जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।
 

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सख्त पंजीकरण प्रक्रिया

गुजरात UCC बिल का सबसे चर्चित प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण से संबंधित है। राज्य में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को निर्धारित समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई जोड़ा इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल या जुर्माने की सजा हो सकती है। इसके अलावा, यदि जोड़े की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो अधिकारियों द्वारा उनके माता-पिता को सूचित किया जाएगा।
 

बहुपत्नी प्रथा पर रोक और विरासत में समान अधिकार

सामाजिक समानता लाने के लिए इस बिल में बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करता है, तो उसे 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। संपत्ति के अधिकारों की बात करें तो, अब से पुत्र और पुत्री दोनों को पिता की संपत्ति में समान विरासत अधिकार मिलेगा। हालांकि, यह कानून राज्य के अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय पर लागू नहीं होगा।

विपक्ष का विरोध और आगे की प्रक्रिया

चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने इस बिल को 'राजनीति से प्रेरित' बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। कुछ मांगें पूरी न होने पर अंततः कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। अब इस बिल को मंजूरी के लिए राज्यपाल और उसके बाद राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही यह कानून आधिकारिक रूप से पूरे गुजरात में लागू होगा।
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