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Last Modified: गांधीनगर , सोमवार, 29 जून 2026 (10:37 IST)

गुजरात शिक्षा बोर्ड का बड़ा फैसला: 10वीं में अब तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य

gujarat education
राज्य में चालू शैक्षणिक वर्ष से कक्षा 10वीं में तीन भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएंगी। शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस फैसले के हिस्से के रूप में शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 10वीं के विषय पैटर्न (स्ट्रक्चर) में बड़ा बदलाव किया गया है। नए नियमों के मुताबिक अब छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य छात्रों में भाषाई कौशल का सर्वांगीण विकास करना और राज्य में नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना है। ALSO READ: Gujarat : गुजरात में बड़ा पल्स पोलियो अभियान शुरू! 82 लाख बच्चों को दी जाएगी जिंदगी बचाने वाली 2 बूंदें
 

कैसे होगा प्रथम और द्वितीय भाषा का चयन?

नए विषय पैटर्न के अनुसार, स्कूल जिस माध्यम का होगा, वह भाषा छात्र के लिए 'प्रथम भाषा' (First Language) के रूप में रहेगी। यानी गुजराती माध्यम के स्कूलों में गुजराती पहली भाषा होगी, जबकि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अंग्रेजी पहली भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही, स्कूल के माध्यम से विपरीत भाषा यानी अंग्रेजी माध्यम के लिए गुजराती और गुजराती माध्यम के लिए अंग्रेजी 'द्वितीय भाषा' (Second Language) के रूप में पढ़ाई जाएगी। इस प्रकार, छात्रों के लिए प्रथम और द्वितीय भाषा के रूप में निर्धारित भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।
 

तीसरी भाषा के रूप में इन विषयों में से चयन करना होगा जरूरी

शिक्षा विभाग के नए नियमों के मुताबिक अब तीसरी भाषा का अध्ययन भी अनिवार्य कर दिया गया है। छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में उपलब्ध विकल्पों जैसे हिंदी, संस्कृत, अरबी, फारसी, सिंधी या उर्दू में से किसी एक भाषा को चुनकर उसका अध्ययन करना होगा। इससे पहले छात्रों को तीसरी भाषा के विकल्प के रूप में अन्य विषयों को रखने की भी छूट मिलती थी, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दिशानिर्देशों के अनुसार तीसरी भाषा के अध्ययन को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। ALSO READ: मानसून से पहले गुजरात सरकार की नई गाइडलाइन: जर्जर कमरों में नहीं लगेगी क्लास, स्कूलों में फर्स्ट एड किट अनिवार्य
 

पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव

अब तक के ढांचे में छात्रों के लिए तीसरी भाषा के वैकल्पिक स्थान पर वोकेशनल (व्यावसायिक) विषय रखने का प्रावधान उपलब्ध था। हालांकि, शिक्षा बोर्ड द्वारा नए विषय पैटर्न में इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब तीसरी भाषा के बदले वोकेशनल विषय रखने का विकल्प हटा दिया गया है। उसकी जगह वोकेशनल विषय को अलग तरह से व्यवस्थित किया गया है, ताकि छात्र भाषा शिक्षा के साथ-साथ कौशल आधारित (Skill-based) अध्ययन का लाभ भी उठा सकें।
 

अब वोकेशनल विषय '8वां विषय'

शिक्षा विभाग के निर्णय के अनुसार, अब से वोकेशनल विषय को मुख्य ढांचे से हटाकर 'आठवें विषय' (8th Subject) के रूप में एक विशेष स्थान दिया गया है। इसका मतलब यह है कि छात्र अब तीसरी भाषा की कीमत पर वोकेशनल विषय का चयन नहीं कर पाएंगे, लेकिन यदि वे चाहें तो इसे एक अतिरिक्त (एडिशनल) विषय के रूप में अलग से जरूर पढ़ सकते हैं। यह नया विषय पैटर्न राज्य के सभी स्कूलों में इसी शैक्षणिक वर्ष से लागू कर दिया गया है, इसलिए कक्षा 10वीं के छात्रों को अब इन नए नियमों के अनुसार ही परीक्षा की तैयारी करनी होगी।
edited by : Nrapendra Gupta 
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