dharma sangrah

कुछ अनमोल दोहे नीरज के

Written By WD
Updated: बुधवार, 8 जुलाई 2015 (13:04 IST)
गोपालदास 'नीरज'
कवियों की और चोर की गति है एक समान
दिल की चोरी कवि करे लूटे चोर मकान
जिनको जाना था यहां पढ़ने को स्कूल
जूतों पर पालिश करें वे भविष्य के फूल
 
करें मिलावट फिर न क्यों व्यापारी व्यापार
जब कि मिलावट से बने रोज यहां सरकार
 
रुके नहीं कोई यहां नामी हो कि अनाम
कोई जाए सुबह को कोई जाए शाम
 
राजनीति शतरंज है, विजय यहां वो पाय
जब राजा फंसता दिखे पैदल दे पिटवाय
 
तोड़ो, मसलो या कि तुम उस पर डालो धूल
बदले में लेकिन तुम्हें खुशबू ही दे फूल
 
पूजा के सम पूज्य है जो भी हो व्यवसाय
उसमें ऐसे रमो ज्यों जल में दूध समाय
 
हम कितना जीवित रहे, इसका नहीं महत्व
हम कैसे जीवित रहे, यही तत्व अमरत्व
 
जीने को हमको मिले यद्यपि दिन दो-चार
जिएं मगर हम इस तरह हर दिन बनें हजार
 
स्नेह, शान्ति, सुख, सदा ही करते वहां निवास
निष्ठा जिस घर मां बने, पिता बने विश्वास
 
किया जाए नेता यहां, अच्छा वही शुमार
सच कहकर जो झूठ को देता गले उतार
 
कागज की एक नाव पर मैं हूं आज सवार
और इसी से है मुझे करना सागर पार
 
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध: जानें भारत की आजादी का इतिहास और महत्व

तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

नई स्टडी: एंथोसायनिन से घट सकता है हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा, जानिए कैसे

मानसून में बालों का झड़ना और चेहरे की चिपचिपाहट होगी गायब, बस डेली रूटीन में शामिल करें ये 5 लाइफस्टाइल टिप्स