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होली पर हंसी-ठिठोली की चंद क्षणिकाएं...

Updated: शनिवार, 11 मार्च 2017 (17:13 IST)
देश के प्रमुख त्योहारों में होली बहुत ही विशेष है। चूंकि इसे मनाने में गांठ में पैसे होना जरूरी नहीं है अत: इसे देश का गरीब से गरीब आदमी भी मना सकता है। यदि यह भी कहा जाए कि 'ऊंचे लोग, ऊंची पसंद, भूलते जा रहे, होली के रंग' तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
 
होली और हास्य-मस्ती का चोली-दामन का साथ है। आइए आपको हंसाने के लिए चंद क्षणिकाओं से रूबरू करवाता हूं।
 

 
मुफ्त पिचकारी
 
मुफ्त पिचकारी का आफर पाकर
बच्चे और मां-बाप दौड़े चले आए।
विक्रेता ने दी मुफ्त पिचकारी और कहा
कृपया इसमें भरे पानी की कीमत चुकाएं।
 
****
 

 


मोबाइल
 
दूर से हमने समझा कि
उनके हाथ में है मोबाइल
रंगे जाने के बाद पता चला
पिचकारी की थी वह नई स्टाइल। 
 
****
 


 


होली के लिए 
 
मंडप में खुद आओगी
लिखा है खत में तुमने कि
होली पर नहीं मिलोगी
घर पर ही रहकर
मेरे फोटो को रंगों से रंगोगी।
मुझे गिला नहीं यदि तुम
होली इस तरह मनाओगी
मगर वादा करो शादी के लिए
खुद मंडप में आओगी। 
 
****
 

जिस तरह वेलेंटाइन डे जैसे प्यार के दिन को हम भारतवासियों ने अपनाया है उसी तरह होली जैसे त्योहार का भरपूर प्रचार विदेश में रह रहे भारत के नागरिकों को करना चाहिए। इन पंक्तियों के माध्यम से मैं अपनी बात रखना चाहूंगा कि



 
होली के रंग
 
रक्षाबंधन के धागे
संक्रांति की पतंग
दिवाली के पटाखे
साथियों खूब खुलकर
वेलेंटाइन डे मना‍ओ
मगर भारतीय त्योहारों को भी तो
जरा विदेशों में पहुंचाओ।
 
****
 

आजकल लड़कियों को बड़ा डर रहता है कि रंग उनकी कोमल त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।


 
देखिए इस बारे में एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से क्या कहता हैं-
 
खराब न हो जाए
तुम्हारे गेसू
रंगों के लिए इसलिए मैं
जंगल से लाया टेसू
 
****
 

हमारी आधुनिक जनरेशन को टेसू के बारे में बता दें कि यह जंगल में उगने वाला एक फूल है जिसे गर्म पानी में बॉइल करके नेचुरल कलर बनाया जाता है जो स्किन फ्रेंडली होता है।


 
तो फिर देर किस बात की। तुरंत अपने प्रियतम या अपनी प्रेयसी को चेतावनी भरे ये एसएमएस कर दें -
 
प्रेयसी को
मेरे रंग तुम्हारा चेहरा
होली के दिन बिठाना पहरा।
दिल तुम्हारा पास है मेरे
अब बचाना अपना चेहरा। 
 
प्रियतम को,
अपने आप को मेरे रंग में
चाहते थे तुम रंगना
यह मियर एसएमएस नहीं चेतावनी है
होली के दिन मुझसे बचकर रहना। 
 
अंत में
रंग यस
भंग यस
रंग में भंग
बस-बस। 

***** 
 
लेखक के बारे में
एमके सांघी
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